माधव नेशनल पार्क में लाई जाने वाली बाघिन पन्ना में लापता, कल शिवपुरी में रोड शो और आमसभा

शिवपुरी के माधव राष्ट्रीय उद्यान (Madhav National Park News) में टाइगर छोड़े जाएंगे। इसके लिए 10 मार्च को टाइगर छोड़ने के लिए केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र सिंह , केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ नेता शिवपुरी पहुंच रहे हैं।

माधव नेशनल पार्क में शुक्रवार को मुख्यमंत्री ​​शिवराज सिंह चौहान तीन बाघों को छोड़ेंगे। इनमें से एक बा​घिन भी है, जो पन्ना से लाई जाने वाली थी, लेकिन उसका कुछ भी पता नहीं है। बा​घिन को पन्ना रिजर्व टाइगर से गायब हुए 24 घंटे का समय बीत चुका है। 

मध्यप्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो अभ्यारण में पिछले साल चीते छोड़े गए थे। छह महीने बाद श्योपुर के करीब माधव नेशनल पार्क में टाइगर छोड़े जा रहे हैं।

ख़ुशी जताते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि मैं केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव और सीएम शिवराज सिंह चौहान को धन्यवाद देना चाहता हूँ कि जो माधव राष्ट्रीय उद्यान पिछले 27 साल से टाइगर की दहाड़ सुनने के लिए तरस रहा था वो सपना उन लोगों की मौजूदगी में पूरा होने जा रहा है।

 सिंधिया ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि मेरे पिताजी के जन्म दिवस बड़ी सौगात मिल रही है। माधव नेशनल पार्क शिवपुरी में अब 27 साल बाद टाइगर आ रहे हैं ।

सिंधिया ने कहा कि ये भव्य आयोजन शिवपुरी ही नहीं, ग्वालियर चम्बल संभाग ही नहीं प्रदेश के लिए गौरव की बात है। उन्होंने बताया कि अब पर्यटक माधव नेशनल पार्क में टाइगर की दहाड़ सुन पाएंगे।

लापता बाघिन की तलाश में टीम जुटी हुई है

पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक बिजेंद्र झा के अनुसार तीन बाघिन चिह्नित की थीं। इनमें से एक को ट्रेंकुलाइज करके माधव राष्ट्रीय उद्यान के लिए भेजना था।

लेकिन जब पन्ना टाइगर रिजर्व से बाघिन को नेशनल पार्क के लिए रवाना करने की प्रक्रिया शुरू हुई तो आखिरी वक्त पर बाघिन ही नहीं मिली।

हमारी टीम तलाश में जुटी हुई है। बाघिन को किसी बाड़े में नहीं रखा गया था, पर उनकी सतत निगरानी की जाती थी। मुख्यमंत्री के 10 मार्च शुक्रवार को प्रस्तावित कार्यक्रम के ठीक पहले बाघिन का न मिलने से माधव राष्ट्रीय उद्यान के अधिकारी भी चिंतित हैं।

आपको बता दें कि माधव नेशनल पार्क में 1990- 91 तक यहां काफी संख्या में टाइगर हुआ करते थे, लेकिन अंतिम बार 1996 में यहां टाइगर देखा गया था।

माधव नेशनल पार्क 375 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है। पूर्व में इस नेशनल पार्क में बाघ हुआ करते थे लेकिन शिकार के कारण यह नेशनल पार्क बाघविहीन हो गया। 

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